विश्व फिज़ियोथेरेपी दिवस के अवसर पर डॉ. के.के.बी.एम. सुभारती अस्पताल, झाझरा में विशेष अभियान का आयोजन, मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य, गतिशीलता एवं जीवन की गुणवत्ता को बढ़ावा देना मुख्य उद्देश्य

देहरादून
विश्व फिज़ियोथेरेपी दिवस के अवसर पर डॉ. के.के.बी.एम. सुभारती अस्पताल, झाझरा, देहरादून के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य, गतिशीलता एवं जीवन की गुणवत्ता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष अभियान आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत 7 सितंबर से 12 सितंबर 2026 तक सभी मरीजों के लिए निःशुल्क फिजियोथेरेपी परामर्श एवं ओ.पी.डी. पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस अवसर पर अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. (लेफ्टिनेंट कर्नल) राहुल शुक्ला ने कहा कि फिजियोथेरेपी आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। चोट, सर्जरी, जोड़ों एवं मांसपेशियों से संबंधित समस्याओं के साथ-साथ लंबे समय से चल रहे दर्द में फिजियोथेरेपी मरीजों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार के साथ-साथ बेहतर पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
फिजियोथेरेपी प्रभारी डॉ. रुचित खेरा ने बताया कि विशेष अभियान के दौरान मरीजों को उनकी समस्या के अनुसार विशेषज्ञ परामर्श एवं आवश्यक फिजियोथेरेपी सेवाएं प्रदान की जाएंगी। उन्होंने कहा कि सही समय पर फिजियोथेरेपी शुरू करने से दर्द में राहत के साथ-साथ शरीर की गतिशीलता और कार्यक्षमता में सुधार किया जा सकता है। अभियान के तहत कमर, गर्दन एवं जोड़ों के दर्द, चोट अथवा सर्जरी के बाद पुनर्वास, सही पोश्चर में सुधार, स्ट्रेचिंग एवं एंड्यूरेंस बढ़ाने जैसी समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस विशेष अभियान में फिजियोथेरेपी विभाग की विशेषज्ञ टीम डॉ. पल्लवी राणा, डॉ. शालिनी एवं डॉ. ज़र शमन मलिक भी मरीजों को आवश्यक परामर्श एवं फिजियोथेरेपी सेवाएं प्रदान करेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित एवं सही तरीके से की गई फिजियोथेरेपी न केवल दर्द कम करने में सहायक है, बल्कि शरीर की गतिशीलता, मांसपेशियों की कार्यक्षमता और दैनिक गतिविधियों में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रचार-प्रसार प्रमुख डॉ. प्रशान्त कुमार भटनागर ने कहा कि विश्व फिजियोथेरेपी दिवस लोगों को अपने स्वास्थ्य और शारीरिक सक्रियता के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण आज कम उम्र में भी कमर, गर्दन, जोड़ों एवं मांसपेशियों से संबंधित समस्याएं देखने को मिल रही हैं। ऐसे में नियमित शारीरिक गतिविधि, सही पोश्चर और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी परामर्श बेहद उपयोगी हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि फिजियोथेरेपी केवल दर्द या चोट के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गतिशीलता में सुधार, मांसपेशियों की कार्यक्षमता बढ़ाने, सर्जरी के बाद शीघ्र पुनर्वास तथा बेहतर जीवन गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
