अपर उ0नि0 विनोद बिष्ट व आरक्षी सुधीष खत्री बने उत्तराखण्ड के पहले साइबर कमाण्डो,

देहरादून
मुख्यमन्त्री उत्तराखण्ड पुष्कर सिंह धामी* के “VISION सरलीकरण, समाधान एवं निस्तारण” के अन्तर्गत व *श्रीमान पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड दीपम सेठ* के दिशा निर्देशन में साईबर धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करते हुये साईबर पीड़ितो को न्याय दिलाया जा रहा है जिसके क्रम में *अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून वी. मुरूगेसन तथा पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून नीलेश आनन्द भरणे महोदय* द्वारा लगातार समीक्षा की जा रही है । इसके साथ ही उन्नत साइबर प्रशिक्षण के लिए नियमित अवसर भी दिए जा रहे हैं।
इस प्रक्रिया में नवनीत सिंह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस0टी0एफ0 उत्तराखण्ड* द्वारा जानकारी देते हुये बताया कि साइबर सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए गृह मंत्रालय भारत सरकार (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र I4C) द्वारा ‘साइबर कमांडो की विशेष शाखा’ की स्थापना की जा रही है|
चयनित कर्मियों में से साइबर कमाण्डो कोर्स के प्रथम चरण में 02 कर्मी *अपर उ0नि0 विनोद बिष्ट तथा आरक्षी सुधीष खत्री द्वारा* दिनांक 07.10.24 से 04.04.25 तक *IIT कानपुर में 06 माह का साइबर कमाण्डो प्रशिक्षण प्राप्त किया गया* जिसमें साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, थ्रेट इंटेलिजेंट, क्रिप्टो करेंसी और क्रिप्टोग्राफी तथा नेटवर्किंग आदि विषयों के मूल सिद्धांतों और और अनुप्रयोगों के विषय में प्रशिक्षण प्राप्त किया गया । उक्त साइबर कमाण्डो कोर्स का समापन IIT कानपुर के आउटरीच सेंटर नोएडा में हुआ| *बहुत जल्द ही 02 और उ0नि0 आशीष गुसांई व उ0नि0 राजेश ध्यानी NFSU दिल्ली से साइबर कमाण्डो का प्रशिक्षण प्राप्त कर पास आउट होंगे* ।
वहीं द्वितीय चरण में उत्तराखण्ड से साइबर कमाण्डो प्रशिक्षण हेतु उत्तीर्ण 72 अभ्यर्थियों को देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थान, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) आदि में गहन व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किये जाने हेतु बारी बारी भेजा जायेगा । साइबर कमाण्डो हेतु चयनित सबसे अधिक कुल 72 कर्मियों की संख्या में उत्तराखण्ड राज्य सम्पूर्ण भारत वर्ष में तृतीय स्थान पर रहा । राज्य से चयनित टॉप-3 पुलिस कर्मियों का ऑल इण्डिया रैंक में दूसरा, छठा व दसवां स्थान रहा था ।
प्रशिक्षित साइबर कमांडो अपने मूल संगठन के लिए काम करेंगे और उनसे डिजिटल फोरेंसिक, घटना प्रतिक्रिया और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने में प्रशिक्षण के दौरान विकसित विशेषज्ञता के अनुसार भूमिकाएं सौंपी जाएंगी ।